इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए लोगों की मदद करना

दुनिया में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली दूसरी सबसे बड़ी आबादी भारत में है. यहां 40 करोड़ से ज़्यादा लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और अगले दो साल में यह संख्या बढ़कर 65 करोड़ हो सकती है. हमारी कोशिश है कि मौजूदा समय में इस्तेमाल करने वाले और भविष्य में इंटरनेट से जुड़ने वाले लोग इसका बेहतर इस्तेमाल कर सकें. इसके लिए हम छात्रों को सिखाने वाले संसाधन और टूल मुहैया कराते हैं ताकि वे आगे चलकर ज़िम्मेदार डिजिटल नागरिक बन सकें और इंटरनेट पर मौजूद खतरों से खुद को सुरक्षित रख सकें. हम ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए शिक्षकों, सरकारी अफ़सरों, और उपभोक्ता संगठनों के साथ भी मिलकर काम करते हैं.

भविष्य के डिजिटल नागरिकों को सशक्त बनाना

हर दिन डिजिटल दुनिया की अहमियत बढ़ रही है और यह असली दुनिया के साथ जुड़ती जा रही है. इसी वजह से Google भारत के बच्चों को डिजिटल दुनिया में अपना पहला कदम रखने के लिए तैयार करने का काम कर रहा है. सही शिक्षा और टूल की मदद से छात्र इंटरनेट के खतरों से बच सकेंगे और नई चीज़ें सीखने के लिए इसका इस्तेमाल करके ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठा सकेंगे.

इंटरनेट पर सुरक्षित कैसे रहें यह जानकारी स्कूलों तक पहुंचाना

हमने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) के साथ मिलकर पूरे भारत के स्कूलों में इंफ़ॉर्मेशन ऐंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रम में डिजिटल नागरिकता से जुड़े कुछ मॉड्यूल शामिल किए हैं. यह पाठ्यक्रम गोवा, केरल और तेलंगाना में शुरुआती तौर पर पढ़ाया जा रहा है और जल्दी ही इसे दूसरे राज्यों में भी शुरू किया जाएगा.

वेब रेंजर्स (Web Rangers) कार्यक्रम

साल 2015 से ही हम भारतीय छात्रों को वेब रेंजर्स कार्यक्रम के ज़रिए ऑनलाइन सुरक्षा एंबेसडर बनने में मदद कर रहे हैं. 75 शहरों से करीब 30,000 एंबेसडर इस कार्यक्रम का हिस्सा बने हैं. इन्होंने ऐप, गेम और वीडियो जैसे खास प्रोजेक्ट और अभियानों के ज़रिए ऑनलाइन सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाने में मदद की है.

सभी एंबेसडर को अपने स्कूलों में जागरुकता फैलाने के लिए ज़रूरी संसाधन और मदद दी जाती है. वे साथ पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सिखाने के लिए अपने स्कूल में वर्कशॉप, रोडशो, नुक्कड़ नाटक करते हैं. छात्र-छात्रा अपने शिक्षकों के साथ मिलकर साइबर सेफ़्टी सेल बनाते हैं और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए गेम और ऐप भी तैयार करते हैं. वेब रेंजर के तौर पर मिले अनुभव ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के कृष्णा पंडित जैसे छात्रों को प्रभावित किया है. कृष्णा ने Netorians की शुरुआत की है. यह स्टार्टअप ऑनलाइन सुरक्षा को समर्पित है.

“स्कूली शिक्षा एक सफल भविष्य की नींव होती है. Google के साथ मिलकर मौजूदा समय की ज़रूरतों के हिसाब से स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में आईसीटी से जुड़ी नई चीज़ें शामिल और लागू करते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है. इंटरनेट के ज़रिए आपस में तेज़ी से जुड़ती जा रही इस दुनिया में हमारे बच्चों के सीखने के लिए यह एक बेहतरीन माध्यम बनता जा रहा है. ऐसे में, शिक्षा से जुड़े हम जैसे लोगों की यह ज़िम्मेदारी है कि बच्चों को सीखने के लिए एक सुरक्षित माहौल मिले. हम उम्मीद करते हैं कि यह कदम बच्चों को इंटरनेट पर खतरों को पहचानने में मदद करेगा ताकि वे सुरक्षित तरीके से इसका फ़ायदा उठा पाएं.”

डॉ. अमरेंद्र बेहरा, संयुक्त निदेशक, सीआईईटी - एनसीआरटी

‘इंटरनेट पर सुरक्षा’ के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए युवा डेवलपर को बढ़ावा देना

2018 की ‘वेब रेंजर्स’ प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे 5,000 से भी ज़्यादा लोगों में से एक, तमिलनाडु के चेन्नई से अर्जुन एस. ने “ALICE Safety Bot,” बनाकर पहला स्थान हासिल किया. “ALICE Safety Bot,” एआई की मदद से चलने वाली एक वर्चुअल असिस्टेंट है जो इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को सुरक्षा से जुड़ी चीज़ें बताती है.

Google Assistant ( में मौजूद ‘चैट बॉट’ से बात करके बच्चे-बड़े, सब डिजिटल काम-काज सुरक्षित तरीके से करने से जुड़े सवाल पूछ कर उनके जवाब पा सकते हैं. यही नहीं, इस टूल को बेहतर और असरदार बनाने के लिए लोग समय-समय पर इसमें नई जानकारी भी जोड़ सकते हैं.

अर्जुन ने ALICE Safety Bot प्रोग्राम के कोड को ऐप्लिकेशन की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है, जहां लोग इसे मुफ़्त में डाउनलोड कर सकते हैं. इसे दूसरे ऐप और वेबसाइट में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. वह इस टूल को भारत और दुनिया भर की दूसरी भाषाओं में भी उपलब्ध कराने में जुटे है.

साइबर सुरक्षा के पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को तैयार करना

भारत के बच्चे अब इंटरनेट पर ज़्यादा समय बिताने लगे हैं और ऐसे में यह ज़रूरी है कि वे सोच-समझकर फ़ैसले लें. इसके साथ उन्हें इंटरनेट पर अपनी जानकारी को सुरक्षित रखना और निजता (प्राइवेसी) को सुरक्षित रखने के तरीके सीखना भी ज़रूरी है.

इन्हीं वजहों से, हम शिक्षकों की मदद कर रहे हैं ताकि वे छात्रों को इंटरनेट का सुरक्षित और बेहतर इस्तेमाल सिखा सकें. क्लासरूम में ऐसी खास चीज़ें सिखाने के लिए शिक्षकों को ज़रूरी जानकारी और टूल मुहैया कराए जा रहे हैं.

पढ़ने के लिए दी गई सामग्री, वीडियो और दूसरी कई गतिविधियों के ज़रिए हमारे डिजिटल नागरिकता और सुरक्षा पर ऑनलाइन कोर्स से शिक्षकों को कई टूल मिलते हैं. इनकी मदद से वे क्लास रूम में छात्रों से बेझिझक बातचीत कर सकते हैं और उन्हें इंटरनेट का आसानी से सुरक्षित इस्तेमाल करना सिखा सकते हैं.

यह कोर्स मुफ़्त में उपलब्ध है और उम्मीद है कि यह साल खत्म होने से पहले 1,00,000 से भी ज़्यादा शिक्षक इसका फ़ायदा उठा पाएंगे.

बीते छह महीनों में 2500 स्कूलों के 15,000 से ज़्यादा शिक्षकों ने यह कोर्स पूरा किया है.

इंटरनेट की दुनिया में महिलाओं के लिए सुरक्षा और बराबरी को बढ़ावा देना

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों में महिलाएं सिर्फ़ 29% हैं. अफ़सोस की बात यह है कि इंटरनेट पर महिलाओं की संख्या कम होने का इंटरनेट पर गलत असर पड़ता है. इसमें, इंटरनेट इस्तेमाल कर पाने और पहचान बनाने से जुड़ी दिक्कतें, अनचाहे और असुरक्षित अनुभव, मशीन-लर्निंग में इस्तेमाल होने वाले डेटा का महिलाओं के हिसाब से न होना शामिल है. इन्हीं वजहों से इंटरनेट से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या हमेशा कम रही है.

हम ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को इंटरनेट से जोड़ने के लिए समर्पित हैं. इसलिए, हम महिलाओं को इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के तरीके सिखा रहे हैं और नई-नई तकनीकों के बारे में भी बता रहे हैं, ताकि सामग्री तैयार करने के मामले में वे पुरुषों से पीछे न रहें.

अपने परिवार को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए माँओं को टूल की ट्रेनिंग देना

माँओं को और उनके परिवारों को सुरक्षित रखने के लिए हमने 2017 में साइबर मॉम्स (Cyber Moms) कार्यक्रम शुरू किया. लॉन्च से लेकर आज तक, हमने दो शहरों में 650 से भी ज़्यादा महिलाओं को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल, निजता (प्राइवेसी) और इनसे जुड़े टूल की ट्रेनिंग दी है. यह उम्मीद है कि अप्रैल 2019 तक इस कार्यक्रम के ज़रिए हम पूरे भारत के 40 शहरों में 2,00,000 से भी ज़्यादा माँओं को यह ट्रेनिंग दे पाएंगे.

डिजिटल दुनिया में महिलाओं को उनकी आवाज़ बुलंद करने के लिए तैयार करना

युवा महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए हमने SheThePeople.TV के साथ मिलकर डिजिटल ट्रस्ट डायलॉग (Digital Trust Dialogue) कार्यक्रम लॉन्च किया. भारत के कुल 10 विश्वविद्यालयों में चल रहा यह कार्यक्रम, महिलाओं को विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने की सुविधा उपलब्ध कराता है. इस बातचीत के बाद Google के कर्मचारी महिलाओं को इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के तरीकों की जानकारी देते हैं.

1500 से भी ज़्यादा छात्राओं के ऐसी कई गतिविधियों में हिस्सा लेने की संभावना है, जहां उन्हें अपने निजी अनुभव शेयर करने का भी मौका मिलेगा. इसके अलावा, SheThePeople.TV की वेबसाइट पर ब्लॉग और लेख के ज़रिए भी वे अपनी बात सबके सामने रख पाएंगी.

मज़बूत और सुरक्षित डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए उपभोक्ताओं को जानकारी देना

जैसे-जैसे भारत इंटरनेट से जुड़ता जा रहा है, यह ज़रूरी है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों को इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के बारे में बुनियादी बातें बताई जाएं ताकि वे अपने साथ-साथ अपने डेटा को भी सुरक्षित रख सकें. ग्राहकों और सरकारी अफ़सरों को ये चीज़ें सिखाने के लिए Google ने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर देश भर के उपभोक्ता संगठनों के लिए ‘ट्रेन द ट्रेनर’ नाम से वर्कशॉप की शुरुआत की है. इन वर्कशॉप में इन संगठनों को ऐसे संसाधन मुहैया कराए जाते हैं जिनके ज़रिए वे उपभोक्ताओं को अपने डिजिटल फ़ुटप्रिंट प्रबंधित करने और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के ऑनलाइन कामों को सुरक्षित तरीके से करने के बारे में जानकारी देते हैं. अभी तक हम 20 राज्यों के 500 से भी ज़्यादा संस्थाओं को इंटरनेट पर सुरक्षा, निजता (प्राइवेसी) और डिजिटल भुगतान से जुड़ी बुनियादी चीज़ों के बारे में ट्रेनिंग दे चुके हैं.

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