लाखों यात्रियों के लिए तेज़ रफ़्तार वाला वाई-फ़ाई

जहां दुनिया हाइपर-कनेक्टेड होने की ओर बढ़ रही है, वहीं भारत की 130 करोड़ की जनसंख्या में से आधे से ज़्यादा लोगों के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं है. Google ने हजारों रेलवे स्टेशनों पर मुफ़्त और तेज़ स्पीड वाले वाई-फ़ाई ह़़ॉटस्पॉट की सुविधा दी है और हज़ारों गांवों में लाखों लोगों को इंटरनेट की जानकारी देकर इंटरनेट से जुड़ने में मदद भी की है. Google की इन पहल से हर महीने लाखों लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, इनमें से बहुत से लोग पहली बार इंटरनेट से जुड़ते हैं.

लाखों यात्रियों के लिए तेज़ रफ़्तार वाला वाई-फ़ाई

2015 से ही हम भारतीय रेलवे और रेलटेल के साथ साझेदारी कर रहे हैं. यह दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक वाई-फ़ाई प्रोजेक्ट्स में से एक है. इसके ज़रिए सैकड़ों रेलवे स्टेशनों पर लाखों यात्री हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ पाते हैं.

रेलवे स्टेशनों पर हर महीने इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे लोगों की संख्या

{[{statsCtrl.number}]}

1 स्टेशन

10 स्टेशन

23 स्टेशन

400 स्टेशन

जनवरी 2016
अप्रैल 2016
अगस्त 2016
फरवरी 2018

अगला पड़ाव: 2018 में 400 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फ़ाई

हमने अब तक 400 से ज़्यादा रेलवे स्टेशनों को इंटरनेट से जोड़ा है. इन रेलवे स्टेशनों से हर रोज़ गुज़रने वाले लाखों यात्री अब तेज़ स्पीड वाले और मुफ़्त वाई-फ़ाई की सुविधा का फ़ायदा ले सकते हैं.हमारा लक्ष्य इस नेटवर्क को 2018 में 400 सबसे ज़्यादा व्यस्त रेलवे स्टेशनों तक फैलाना है, इससे इस्तेमाल करने वालों की संख्या के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक वाई-फ़ाई नेटवर्क तैयार होगा.

इस वाई-फ़ाई की मदद से यात्री ऑनलाइन एचडी (HD) वीडियो देख सकते हैं, अपनी मंज़िल की तलाश कर सकते हैं या इंटरनेट पर काम करते हुए बुक डाउनलोड कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि शुरुआत में यह सेवा मुफ़्त है. लंबे समय में हमारा लक्ष्य है कि इसे खुद पर निर्भर बनाया जाए ताकि इसका विस्तार दूसरे स्टेशनों और जगहों पर किया जा सके.

ऋतिक, जम्मू

“मैं स्कूल के बाद रोज़ इस स्टेशन पर आता हूं ताकि वाई-फ़ाई इस्तेमाल कर सकूं. मैं अपने आप मार्शल आर्ट सीखने के लिए यू ट्यूब पर ताइक्वांडो वीडियो देखता हूँ। हाल ही में मुझे राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वानडो प्रतियोगिता के लिए चुना गया. साथ ही मैं पढ़ाई से जुड़े वीडियो भी डाउनलोड करता हूं ताकि घर पर देख सकूं.“

ऋतिक, जम्मू

स्टेशन-दर-स्टेशन

300 से ज़्यादा स्टेशन पहले ही स्थिर, बिना रुकावट और तेज़ रफ़्तार वाले वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ चुके हैं.

ये स्टेशन कौन से हैं, जानने के लिए मैप देखें.

3,00,000 गांवों में महिलाओं को सक्षम बनाना

साल 2017 की आईएमआरबी आईक्यूब रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के गांवों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले हर 10 लोगों में से महिलाओं की संख्या सिर्फ़ 1 है. Google इस लैंगिक अंतर को पाटने के लिए प्रतिबद्ध है. हम गांवों में भारतीय महिलाओं को सक्षम बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए और अपने समुदाय के फ़ायदे के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकें.

इंटरनेट साथी पहल

हमने Tata Trusts के साथ साझेदारी में साल 2015 में इंटरनेट साथी की शुरुआत की. इसके तहत देश भर के गांवों में महिलाओं को इंटरनेट का इस्तेमाल करना सिखाया जाता है. खुद सीखने के बाद ये “साथी” अपने और पड़ोस के गांवों में दूसरी महिलाओं को इंटरनेट का इस्तेमाल करना सिखाती हैं. ये महिलाएं जानकारी खोजने, नए स्किल सीखने और नए अवसर पाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं. इससे उन्हें अपने समुदायों में बड़ा सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाने में मदद मिलती है. इस तरह के प्रशिक्षण से गांवों में शिक्षा का एक दौर शुरू हुआ है, जिसका पूरे भारत में युवाओं और ग्रामीणों पर अच्छा असर पड़ रहा है.

इंटरनेट साथियों द्वारा प्रशिक्षित महिलाओं की संख्या

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दिसंबर 2015
अप्रैल 2016
अगस्त 2016
अगस्त 2018

साथियों से मिलें

आसिया की कहानी

आसिया की कहानी

कोल्हापुर, महाराष्ट्र

आसिया इकतीस साल की हैं और उन्होंने कॉलेज से ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है. आसिया अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती हैं, और वह एक प्रतिबद्ध इंटरनेट साथी भीहैं और उन्होंने अब तक करीब 900 महिलाओं को प्रशिक्षित किया है. वह अपने पति के साथ मिलकर किराने की दुकान संभालती हैं और हर रोज़ इंटरनेट का इस्तेमाल सेहत और पोषण से जुड़ी खबरें पढ़ने में करती हैं. उन्हें इंटरनेट से खरीदारी भी करना पसंद है और अक्सर घर के काम की चीज़ें और कपड़े Paytm, Amazon और Snapdeal का इस्तेमाल करके रीदती हैं. ऑनलाइन खरीदारी करके उन्होंने अपनी किराने की दुकान को बेहतर बनाया है और कई तरह की चीज़ें बेचने लगी हैं, आसिया ने ऑर्डर की लागत कम की है और उनकी दुकान में आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है.

आसिया ने गॉव की महिलाओं को गॉव से एक अलग स्थानीय बाजार परिकल्पना के लिए संगठित किया है जहॉ वे अपने कला, खाद्य पदार्थों और सौंदर्य उत्पादों सहित अपने हस्तनिर्मित माल का योगदान कर सकती हैं. इंटरनेट की सहायता से, इन महिलाओं को रेसिपी (पाक विधि) और वीडियो मिलते हैं जो उनके छोटे व्यवसायों में लगातार सुधार और नवाचार को प्रेरित करते हैं.

नीलम की कहानी

बांसवाड़ा, राजस्थान

बीए कोर्स में तीसरे साल की छात्रा नीलम एक इंटरनेट साथी के तौर पर काम कर रही थीं जब उन्हें लगा कि वो शिक्षक बन सकती हैं.

नीलम तीन अलग-अलग गांवों में महिलाओं को स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल सिखाने और इंटरनेट पर चीज़ों को खोजना सिखाने का काम कर रही थीं।. फिर उन्होंने असिस्टेंट ट्रेनर या सहायक प्रशिक्षक बनने का निर्णय लिया। आखिरकार, नीलम को उनके 50 सहकर्मियों में से उनके राज्य में इंटरनेट साथियों का मास्टर ट्रेनर बनने के लिए चुना गया. इससे उनकी आमदनी बहुत बढ़ गई और उन्हें अपना ज्ञान और संवाद का हुनर दिखाने का मौका मिला.

नीलम का मानना है कि इंटरनेट की मदद से उनके आस-पास के लोगों की ज़िंदगी सुधर सकती है। . नीलम को आखिरकार प्रमोशन मिला और उन्हें डिजिटल लाइवलीहुड प्रोग्राम या डिजिटल आजीविका कार्यक्रम का कोऑर्डिनेटर बना दिया गया. अब वो पूरे क्षेत्र में इंटरनेट साथियों की मदद करती हैं.

नीलम की कहानी

गांव-दर-गांव

अब तक 36,000 से ज़्यादा “साथी” कुल 13 राज्यों के 200,000 गांवों की 2.0 करोड़ से भी ज़्यादा महिलाओं को इंटरनेट की जानकारी दे चुकी हैं.

किन गांवों में “साथी” कार्यक्रम चल रहा है, यह जानने के लिए मैप देखें.

महिलाओं की ज़िंदगी में बेहतर बदलाव

इंटरनेट साथी शुरू होने के दो साल बाद, हमने कार्यक्रम का असर जानने के लिए पहले ट्रेनिंग ले चुकी महिलाओं का सर्वे किया. सभी महिलाओं ने यह माना कि उनकी ज़िंदगी पर इसका अच्छा असर पड़ा है. सर्वे से यह भी पता चला कि ट्रेनिंग ले चुकी हर 4 महिलाओं में से 1 महिला, ट्रेनिंग के बाद भी इंटरनेट का इस्तेमाल करती रही. खास बात यह थी कि कई महिलाओं ने कहा कि इंटरनेट के इस्तेमाल से उनकी ज़िंदगी पहले से बेहतर हुई है. कुछ ने तो यहां तक कहा कि इंटरनेट सीखने के बाद उनका सामाजिक और आर्थिक स्तर भी पहले से बढ़ गया.

इंटरनेट साथी के असर के बारे में और जानें:

दो साल बाद होने वाला असर

90%

महिलाएं, जिन्हें “साथी” औरतों से ट्रेनिंग मिली है, वे इंटरनेट को अच्छी तरह से समझती हैं

25%

ट्रेनिंग लेने वाली महिलाएं, औसत तौर पर इंटरनेट का इस्तेमाल जारी रखती हैं.

33%

ट्रेनिंग लेने वाली महिलाएं मानती हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है

 

 

Google की ओर से अधिक पहल

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दुनिया में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली दूसरी सबसे बड़ी आबादी भारत में है. यहां 40 करोड़ से ज़्यादा लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और अगले दो साल में यह संख्या बढ़कर 65 करोड़ हो सकती है.

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